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एनआरसी पर ममता दी का विरोध या हंगामा ?

एनआरसी पर ममता दी : ममता बनर्जी ने कल राजधानी कोलकाता में नेशनल सिटीजंस चार्ट एनआरसी को लेकर सड़क पर विरोध प्रदर्शन करते हुए एक रैली को संबोधित किया| टीएमसी सुप्रीमो ने अपने पार्टी के साथियों के साथ सीनथी मोरे से लेकर शहर के उत्तरी भाग तक मार्च निकाला और उसके बाद श्यामबाजार फाइव प्वाइंट क्रॉसिंग जो कि 5 किलोमीटर की दूरी पर था वहां पर उन्होंने एक रैली को संबोधित किया|

आपको बता दें कि असम में जारी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स के विरोध में पश्चिम बंगाल की तृणमूल सरकार बहुत पहले से रही है और इस बात पर केंद्र सरकार से उसकी आर-पार हर मौके पर हो चुकी है| बता दे कि एनआरसी जो असम में लागू हुई वह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशन में चल रही है और उसमें करीब 19 लाख लोगों के नाम जो कुल 3.29 करोड़ लोगों के बीच गायब रहा जब यह आंकड़ा 31 अगस्त को जारी किया गया था|

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बता दें कि इस मामले को लेकर भाजपा और तृणमूल सरकार एक दूसरे के खिलाफ आमने-सामने आ चुकी है वह भी कई बार| अब देखने वाली बात या फिर कहें समझने वाली बात यह है कि क्या यह ममता दीदी का विरोध था या फिर एक हंगामा क्योंकि जहां असम के लोगों ने एनआरसी पर भाजपा सरकार को समर्थन दिया हुआ है इसके खिलाफ कोई प्रदर्शन नहीं हो रहा बल्कि इसमें जो लोग रह गए हैं सिर्फ उन लोगों ने अपनी आवाज उठाई है और सरकार ने उनके पक्ष में ही सुप्रीम कोर्ट में पुनः 30% चेकिंग करने की अर्जी डाली है ताकि जो लोग रह चुके और हैं जो घुसपैठिये गलत तरीके से एनआरसी रजिस्टार में जोड़े गए हैं उनका नाम हटाया जा सके |

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कोलकाता में ममता दीदी को सड़क पर चलने का बड़ा शौक है इसलिए उन्होंने एनआरसी का मुद्दा उठा लिया जो कि ट्विटर पर उनको जवाब देने के लिए सामने आए भाजपा के बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय और उन्होंने कहा कि ममता दीदी तुष्टिकरण की राजनीति कर रही है और वह नहीं चाहती हैं कि बांग्लादेश घुसपैठिये और रोहिंग्या मुसलमान राज्य से बेदखल हो| कैलाश विजयवर्गीय का बीजेपी की तरफ से साफ साफ यह आरोप ममता बनर्जी सरकार पर है कि ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल बांग्लादेश बनाने पर तुली हुई है|

 

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जिस तरीके से ममता बनर्जी ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करते हुए एक प्रायोजित मार्च कम रैली का आयोजन किया उससे साफ जाहिर होता है कि यह मुद्दे के नाम पर केवल एक पॉलिटिकल हंगामा था ना कि विरोध क्योंकि अभी बंगाल में एनआरसी मुद्दे को लेकर न ही स्क्रीन सरकार नहीं राज्य सरकार और ना ही सुप्रीम कोर्ट ने कोई पहल की है

ऐसे में ममता बनर्जी सरकार जानबूझकर बंगाल का असम के प्रति पुराने द्वेष को जताने के लिए एनआरसी मुद्दे को भुनाने में लगी हुई है ताकि इसका सियासी माइलेज उन्हें अल्पसंख्यक वोट बैंक के रूप में मिल सके, हाँ लेकिन यह बात अलग है कि साल 2005 में जब वह विपक्ष में थी तो उन्होंने बांग्लादेश से होने वाले घुसपैठ के मुद्दे पर लोकसभा स्पीकर पर ही कागज़ फ़ेंक दिए थे| तो इससे समय के साथ सियासत के लिए उनके दोगले होनी की बाद साफ़ तौर पर साबित हो जाती है !

 

 

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